परिवर्तन तभी सार्थक है जब उसे स्वीकार करने की सामथ्र्य हो – CM भूपेश

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परिवर्तन संस्था के कार्यक्रम में हुए शामिल  

नई दिल्ली(realtimes) छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि किसी भी समाज में परिवर्तन तभी सार्थक होता हैं जब उस समाज में परिवर्तन को स्वीकार करने की सामथ्र्य हो। श्री बघेल आज नई दिल्ली में परिवर्तन संस्था द्वारा आयोजित समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल करने वाली प्रतिभाओं के सम्मान समारोह में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के पिता नंदकुमार बघेल और अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य,संस्कृति और समाज के क्षेत्र में जो कार्य किये जाते है वो चिरस्थायी प्रकृति के होते है। यह कार्य दर्शाते है कि समाज में तत्कालिन समय में क्या घटित हो रहा है और उसका समाज पर किस प्रकार प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि हमारा समाज कर्मठ समाज है तथा हमेशा संघर्ष के लिए तत्पर रहता है। उन्होंने कहा कि यह समाज संघर्ष से ही आगे बढ़ा है। उन्होंने कहा कि इस देश में हो रहे परिवर्तन और उसे आगे बढ़ाने में आपकी भी महती भूमिका है। छत्तीसगढ़ के गठन का जिक्र करते हुए उन्होंने खूबचंद बघेल और चन्दूलाल चन्द्राकर सहित सभी महापुरूषों के योगदान का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि अगर एकजुट होकर कोई भी प्रयास किया जाये तो सफलता जरूर मिलती है।

उन्होंने कहा कि हमारा समाज स्वाभिमानी समाज है और जब छत्तीसगढ़ में किसान का पुत्र मुख्यमंत्री बना तो उसने सबसे पहले जो निर्णय लिए वो किसानों के ही हित में थे। उन्होंने कहा कि कृषि से ज्यादा रोजगार कोई और सेक्टर नहीं दे सकता है। उन्होंने बताया कि अनाज के साथ साथ रोजगार के क्षेत्र में भी स्वालंबी बनना होगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ की नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी योजना का जिक्र करते हुए बताया कि किस तरह से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए इस तरह की योजनाओं को अमल में लाना होगा।

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