बैलाडीला खदान पर सियासत की लीला

सरकार से मिला आदिवासी समुदाय,
भूपेश अकबर ने सुना पक्ष, मानी ये मांग

रायपुर( anwar qureshi@realtimes) बैलाडीला लाैह अयस्क खदान मामले को लेकर बस्तर के कांग्रेस सांसद दीपक बैज के नेतृत्व में राज्य के आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधि मंडल ने मंगलवार को राज्य सरकार से मिलकर अपना पक्ष तथा मांग रखी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, वन एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर ने इस प्रतिनिधि मंड़ल से चर्चा की। मुलाकात के दाैरान वरिष्ठ आदिवासी नेता तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम के साथ बस्तर के कुछ कांग्रेस विधायक भी माैजूद थे।

ये मांग हुई मंज़ूर

वनों की कटाई पर तुरंत रोक.

वर्ष 2014 के फर्जी ग्राम सभा के आरोप की जांच कराई जाएगी.

क्षेत्र में संचालित कार्यो पर तत्काल रोक लगाई जावेगी.

राज्य सरकार की ओर से भारत सरकार को पत्र लिख कर जन भावनाओं की जानकारी दी जाएगी.

CM भूपेश बोले

बैठक में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रतिनिधि मंडल के द्वारा इस क्षेत्र में अवैध रूप से वनों की कटाई की शिकायत की जांच की जाएगी तथा नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह प्रभावित क्षेत्र में वन कटाई का कार्य तत्काल रोका जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि संबंधित क्षेत्र में परियोजना से संबंधित संचालित कार्यो पर भी रोक लगाई जाएगी। प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि खदान हस्तानांतरण आदि प्रक्रिया में ‘पंचायत स्तर पर विस्तार का कानून अधिनियम 1996 (पेशा)‘ के तहत वर्ष 2014 में कराए गए ग्राम सभा का पालन नहीं किया गया तथा फर्जी रूप से ग्राम सभा आयोजित की गई। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधि मंडल को आश्वस्त किया कि फर्जी ग्राम सभा के आरोप की जांच कराई जाएगी। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधि मंडल की मांग पर कहा कि संबंधित विषयों पर भारत सरकार द्वारा पत्राचार किया जाएगा और जनभावना की भी जानकारी दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया की राज्य शासन अपने क्षेत्राधिकार की कार्रवाई करेगा लेकिन खदान पर आधिपत्य एवं स्वामित्व भारत सरकार के एन.एम.डी.सी. का है और उन्हें ही खदान के संबंध में कोई भी निर्णय लेने का अधिकार है।

विवादित है मामला गरमाई है सियासत

बैलाडीला खदान का मामला फिलहाल राज्य की सियासत के लिए एक संवेदनशील मामला बना हुआ है। इस खदान से एक विशालकाय उद्योग समूह के जुड़े होने वजह से सत्ताधारी दल ही नहीं राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा भी फूंक-फूंक कर आरोप लगा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी अपनी क्षेत्रीय पार्टी छजकां के साथ राज्य सरकार को निशाने पर लेने के प्रयास में हैं। कुछ दिनों पहले वे उसी विवादित खदान या पहाड़ी पर भी यात्रा कर आए हैं। उनके निशाने पर भाजपा भी है। इस मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री का पार्टी की ओर से यह बयान सामने आया था कि माैजूदा कांग्रेस सरकार ने खदान क्षेत्र में 25 हजार से अधिक पेड़ काटने की अनुमति दी है। लेकिन दूसरी ओर वन एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर ने दस्तावेजी प्रमाण पेश किए कि पेड़ों को काटने की अनुमति पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने जनवरी 2018 में दी थी। इसके बाद मंगलवार को छजकां ने कुछ नए आरोप सामने लाए हैं। माना जा रहा है कि इस मामले में राज्य सरकार 12 तारीख को होने वाली राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में महत्वपूर्ण फैसला ले सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि खदान खोदने वाले को मिलती है या उस जमीन पर रहने वाले हकदार बने रहेंगे।

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