फीस अधिसूचित करने की मांग पर अड़े पालक, राज्यपाल और सीएम से लगाई गुहार

रायपुर। राजधानी में जिलाधीश से मिलने पहुंचे पालकों को मायूस होकर लौटना पड़ा। जिलाधीश भारती दासन ने पालकों से दो टूक कह दिया, कि उनके बच्चे भी  उसी स्कूल में पढ़ रहे हैं और उन्हें स्कूल की फीस देने में कोई तकलीफ़ नहीं है। आप पहले फीस पटाएं फिर बात करने आए।

पूरे प्रदेश में बच्चों के पालक फीस को लेकर आंदोलित हैं मगर ऐसा लगता है कि शासन – प्रशासन को इससे कोई मतलब ही नहीं है।  राजधानी रायपुर के कलेक्ट्रेट में बड़ी संख्या में पालक राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे। कलेक्टर ने  केवल दो पालकों को ही मिलने के लिए बुलाया। उन्हें ज्ञापन सौंपते  हुए  होलीक्रॉस स्कूल, कापा के पालक धीरज दूबे ने बताया कि  उनके स्कूल में  कुल 37 हजार रूपए की फीस मांगी जा रही है, जो काफी ज्यादा है, तब कलेक्टर ने स्कूल का नाम पूछा और कहा कि उनके बच्चे भी उसी स्कूल में पढ़ते हैं और उन्हें फीस देने में कोई तकलीफ़ नहीं हुई। कलेक्टर ने  हाई कोर्ट के आदेश का हवाला भी दिया।

कलेक्टर के इस प्रकार के जवाब से पालक काफी निराश हुए। उन्हें जिले के मुखिया से उम्मीद थी, लेकिन  उनके पास से वे नाउम्मीद होकर लौटे।  पालक इस बात से गुस्से  में हैं कि स्कूल संचालक मनमाने तरीके से फीस वसूल रहे हैं, और दूसरी तरफ प्रशासन उनकी सुनने को तैयार नहीं है।  इस मौके पर पालकों ने जिलाधीश को राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपा।

इससे पूर्व पालकों  ने  छत्तीसगढ़ छात्र – पालक संघ के बैनर तले रायपुर प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता का आयोजन किया। संघ के अध्यक्ष नजरुल खान ने मांग की है कि सभी निजी स्कूलों की फीस विधिवत तरीके से अधिसूचित की जाए, उसके बाद ही पालक ट्यूशन फीस जमा करेंगे। साथ ही सेवा और नो प्रॉफिट नो लॉस व्यवसाय  की आड़ में हर वर्ष करोड़ों रुपए की कमाई करने वाले स्कूल संचालकों की संपत्ति की जांच कराई जाए, और राज्य में फीस विनियामक अधिनियम लागू होने की स्थिति में सबसे पहले फीस का निर्धारण विधिसम्मत ढ़ंग से कराया जाए।

रायपुर की तरह बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, कोरबा और अन्य शहरों में भी पालक आंदोलित हैं, मगर प्रशासनिक अधिकारी तथा शासन के नुमाइंदे भी इनकी सुन नहीं रहे हैं, जबकि पालकों की केवल यही मांग है कि स्कूल फीस को अधिसूचित कर दिया जाए। अब पालकों को राज्यपाल  और मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री से उममीद हैं, अगर वहां से भी इन्हें न्याय नहीं मिला तो ये न्यायालय की शरण में जाने तैयार हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *